(N/A) रेडियोधर्मी नाभिक के विघटन के दौरान $\gamma$-किरणों (फोटॉन) के उत्सर्जन की प्रक्रिया को गामा क्षय कहा जाता है।
गामा क्षय में उत्सर्जित $\gamma$-किरणों का न तो कोई द्रव्यमान होता है और न ही कोई आवेश,इसलिए पुत्री नाभिक की द्रव्यमान संख्या और परमाणु क्रमांक में कोई परिवर्तन नहीं होता है। इसका सामान्य समीकरण इस प्रकार है:
${ }_{Z}^{A} X^* \rightarrow{ }_{Z}^{A} X+{ }_{0} \gamma^{0}$
जहाँ ${ }_{Z}^{A} X^*$ उत्तेजित अवस्था में नाभिक को दर्शाता है और ${ }_{Z}^{A} X$ मूल अवस्था (ground state) में नाभिक को दर्शाता है।
परमाणु ऊर्जा स्तरों के बीच का अंतर $eV$ की कोटि का होता है,जबकि नाभिकीय ऊर्जा स्तरों के बीच का अंतर $MeV$ की कोटि का होता है।
जब उत्तेजित अवस्था में कोई नाभिक स्वतः ही अपनी मूल अवस्था (या निम्न ऊर्जा अवस्था) में आता है,तो नाभिक के दो ऊर्जा स्तरों के अंतर के बराबर ऊर्जा वाला एक फोटॉन उत्सर्जित होता है। इसे ही गामा क्षय कहते हैं।
उदाहरण: कोबाल्ट-$60$ $(^{60}_{27}Co)$ $\beta^-$ क्षय से गुजरकर निकेल-$60$ $(^{60}_{28}Ni^*)$ की उत्तेजित अवस्था बनाता है। इसके बाद यह उत्तेजित नाभिक $1.17 \ MeV$ और $1.33 \ MeV$ ऊर्जा वाले दो क्रमिक गामा फोटॉन उत्सर्जित करके मूल अवस्था में वापस आ जाता है।